जैव विविधता और पारितंत्र
प्रजातियों का लोप और मिट्टी का क्षरण खेती, जल-चक्र और जलवायु संरक्षण — तीनों की ज़मीन एक साथ खींच लेते हैं। नुकसान शांत, बिखरा हुआ और लगभग अपरिवर्तनीय है।
मामला क्या है
स्वस्थ मिट्टी, पीट-भूमि और जलस्रोत बुनियादी ढाँचा हैं, भले ही वे किसी बहीखाते में न दिखें।
अभी क्यों
जो विलुप्त हुआ वह विलुप्त ही रहता है; पुनर्बहाली में दशकों लगते हैं, विनाश में एक मौसम।
उपाय
पीट-भूमि का पुनः आर्द्रीकरण, कृषि सब्सिडी का पुनर्गठन, भूमि की खपत के बजाय संरक्षण, आयातित वन-कटाई के विरुद्ध आपूर्ति-शृंखला नियम।